Kya Maine Dharam Parivartan Kiya Hai?/क्या मैंने धर्म परिवर्तन किया है?
क्या हम ये विश्वास करते हैं की जो हम देखते हैं उसका कोई न कोई रचयता हैं?
आपका जवाब या तो हाँ हो सकता हैं,
या ना हो सकता हैं।
पहले मैं हाँ वाले के लिए लिखता हूँ,
मैं अपने विचार को पूरी इमानदारी से आपके बीच मे रखूँगा।
देखें कोई हैं जिसने सब कुछ बनाया हैं उसने मनुष्य को भी बनाया हैं यानी आप और मैं और यदि आप इसको पड़ पा रहे हैं तो जान लीजिय की आपको सब श्रृष्टि से अलग और अनोखा बनाया हैं, आपकी उम्र कितनी भी क्यो न हो आपने कुछ चीजों को अपने जीवन मे अनुभव जरूर किया होगा।
की मनुष्य अपने जीवन को कुछ ऐसे बिताते हैं जैसे वो सबसे जो इस पृथ्वी पर हैं उससे अलग हैं, हर जगह पर मनुष्य जा चुके हैं, बहुत सारे जानवर लुप्त हो गए हैं, चाहे वो पानी में के हो या जमीन पर चलने वाले, पक्षी हो या रेंगने वाले, पेड़ हो या पौधें, बहुत सारे तरह तरह कि रचना लुप्त हो गए हैं, लेकिन जब मनुष्य की बात होती हैं तो वो जो बुद्धि उन्हें मिली हैं या सोचने और समझने की शक्ति उन्हें दी गई हैं उसके दम पर वो अपने आप को सिर्फ बढ़ाते जा रहे हैं।
ये तो देखने का नज़रिया था।
अब कुछ अनुभव को देखते हैं
हम सब मनुष्यों के जीवन में ये पल सबके जीवन में जरूरु आता हैं जिसमे हम सब एक नये जीवन यानी किसी बच्चे के जन्म को देख कर खुश हुए होंगे ।
फिर दूसरी तरफ किसी अपने के जीवन को छोढते हुए देखा हैं और उनके जाने से हमे दुख भी हुआ हैं
लेकिन क्योंकि हमने एक सुरुवात को और अंत को देखा हैं पहले जन्म होता हैं जो उसके जीवन की सुरुवात फिर मृत्यु होती हैं जो उसके जीवन का अंत होता हैं। इस बात से हम सबके मन में सवाल तो आता हैं की जन्म से लेकर मृत्यु तक के बीच में जो कुछ हम देखते हैं क्या इसका कोई सुरवात हैं क्या इसका भी अंत होगा।
जब हम इस पृथ्वी पर आते हैं या जब हमारे जीवन की सुरवात होती हैं तब हम धीरे धीरे अपने आस पास की चीजों को अनुभव करते हैं और उन्हें जैसे-
खुश होना, दया करना, तरस खाना, बुरा लगना, दुखी होना, माफ़ करना, गुस्सा होना, इंतज़ार करना, उत्साहित होना, और प्रेम रखना जैसे कई भावों को हम महसूस करते हैं ये सब कहाँ से आता हैं ये भी एक प्रशन हैं?( कुछ कहते हैं ये सब मन की भावनाएं हैं लेकिन ये मन कहा पर होता हैं ऐसे प्रशन आते हैं फिर कुछ कहते हैं ये हमारा दिमाग हैं जो ऐसे भावों को प्रगट करवाता हैं ) ये जो भावनाएं हमने उपर देखी ये लगभग हर एक जीवित प्राणियों में हम देख सकते हैं, जैसे इन सभी भावनाओ को किसी एक रचयता ने बनाया हो ।
जब हम पृथ्वी पर रहते हैं तो हमारे आस पास हमारे जैसे बहुत सारे मनुष्य रहते हैं जिनको देख कर हम खुशी या अपने दुख को बांटते हैं, कभी क्रोध करते हैं उनपर कभी प्यार करते हैं। ये तो वो बातें हैं जिन्हें हम देख सकते हैं प्रगट रूप में महसूस कर सकते हैं,
लेकिन कही न कही हमारे अंदर एक इच्छा रहती हैं जब हम श्रृष्टि को देखते हैं की क्या इसका रचने वाला इसको बस रच कर चला गया और कैसे इन सब चीजों की रचना हुई इसकी शुरुआत कहा से हुई हैं क्या इसका भी कोई अंत हैं जैसे एक मनुष्य के जीवन का होता हैं।
कुछ चीजें हमें दिखती हैं और हमारा दिमाग उन्हें हकीकत यानी असली समझता हैं और जो चीजें हमें दिखाई नहीं देती जैसे हमारी भावनाएं इन्हें भी हमरा दिमाग ऐसे देखता हैं जैसे ये हमारे जीवन का भाग हैं
लेकिन हम मे कुछ और भी हैं इस शरीर और इन भावनाओं के अलावा जो हमें इस श्रृष्टि के रचयता और हमें भी जिसने बनाया हैं उसको ढूंढने की इच्छा को करता हैं वो दिखाई नही देता लेकिन जैसे शरीर हमें बाहर से चलाता हैं वैसे ही वो भी हमें अंदर से चलाता हैं और जो भी कुछ अंदर महसूस होता हैं यह वही महसूस करवाता हैं जिसे आत्मा भी कहा जाता हैं।
ये आत्मा अपने बनाने वाले को follow करती हैं यानी जिन जिन बातों को हमारे रचयता ने हमारे अंदर डाली थी उन बातों को हमें महसूस करवाता हैं,
कोई भी चीज ऐसी नही हैं जिसका कोई मतलब न बनता हो हर एक वस्तु या चीज़ या बात का अर्थ हैं, सब चीज़ एक उदेश्य के साथ बनाईगई हैं और जिसने इन सबको बनाया हैं वो बहुत ही सुंदर हैं क्योंकि उसकी रचना खूबसूरत हैं।
लेकिन जब हम अपने रचयता को पुकार ते हैं तो वह सुनता हैं और अपने आपको प्रगत भी करता हैं इसका अर्थ यह निकलता हैं की वह भी चाहता हैं की हम उसके साथ संगति करे जैसे हम अपने आस पास के लोगों के साथ रहते हैं हस्ते हैं खुशियाँ मनाते हैं वैसे हमारा रचयता भी हम से प्रेम करता हैं क्योंकि उसने हमारे अंदर जो आत्मा दी हैं वह हमें उसकी इच्छा को जानना और उसकी बातों को मनना सिखाती हैं।
लेकिन जब मैंने Bible को पढ़ा तब मेरे सारे सवालों के जवाब ऐसे मिलने लगे जैसे पहले सब कुछ धुन्दला सा दिखाता और समझ आता था लेकिन जब मैंने Bible को पढ़ा तो सब कुछ साफ साफ समझ आता हैं की परमेश्वर हमारा रचयता हमसे कितना प्रेम करता हैं जब मैं उसके वचन को पढ़ने लगा तब मैंने मेरे बारे में जाना क्योंकि एक रचना के बारे में वही बता सकता हैं जिसने उसे रचा हैं। जब मैंने bible में ये पढ़ा की परमेश्वर ने ही इन वचनों को लिखवाया ताकि मैं परमेश्वर के बारे में जान सकु की मनुष्य इतना अच्छा कैसे हैं की वह हर श्रृष्टि से बढ़ कर अधिकार रखता हैं, कैसे मनुष्य को परमेश्वर ने अपने पुत्र और पुत्री, बेटा और बेटी कर के बनाया ताकि वह हमारे साथ संगति कर सके कैसे पहले हम परमेश्वर को देख सकते थे जैसे आज हमें दुख होता हैं तो हमारा शरीर भी दुखी होता हैं दुःख दिखाई नही देता लेकिन हम दुःख के प्रभाव को देख सकते हैं और दुख सिर्फ एक जन को नहीं होता हैं लेकिन जो उस व्यक्ति के आस पास होते हैं उनपर भी वह दुख प्रभाव डालता हैं वैसे ही हम पहले परमेश्वर की उपस्थिति को भी महसूस करते थे लेकिन परमेश्वर की उपस्थिति में दुख और पीड़ा और तमाम प्रकार के बुरी भावनाएं नहीं होतीं हैं ये तब आया जब शैतान ने जो परमेश्वर से अपने आपको बड़ा समझता हैं और परमेश्वर की रचना को बिगाढना चाहता हैं उसने हमें परमेश्वर से दूर किया....
मनुष्य परमेश्वर की समानता में बनाया गया हैं उसके अंदर कुछ भी ऐसा नही हैं जो परमेश्वर को पसंद ना हो परमेश्वर ने हमे अच्छा बनाया हैं।
परमेश्वर ने हमे स्वतंत्र बनाया हैं
हमें अधिकार रखने के लिए बनाया हैं परमेश्वर की श्रृष्टि पर।
परमेश्वर चाहते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमें बनाया हैं इसलिए परमेश्वर जानते हैं की हम जीवित कैसे रहेंगे हमें क्या करना चाहिए या क्या नही करना चाहिए वो सब जानते हैं इसलिए परमेश्वर चाहते है की हम परमेश्वर की आज्ञा माने परमेश्वर की बातों पर चले लेकिन शैतान ने मनुष्य को परमेश्वर के प्रति बहकाया और परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ने के लिए उकसाया मनुष्य ने अपने सिरजनहार, रचनेवाले, बनानेवाले, सृष्टिकर्ता की आज्ञा को नही माना और क्योंकि परमेश्वर जो सबसे बड़े हैं उससे बड़ा कोई नही जिसकी आज्ञा को मानकर ये सृष्टि चलती हैं जो न्यायि परमेश्वर हैं जो जिसे चाहे जीवन देता हैं जिसका चाहे जीवन लेता हैं वो परमेश्वर जो सिद्ध हैं और जिसमें कोई चूक नही जिसका न्याय सिद्ध हैं जो अपने वचन को कभी भूलता नहीं
मनुष्य ने उसकी आज्ञा को तोड़ा और शैतान के बहकाये में आ गया इस लिए मनुष्य को मृत्यु ने घेरा और उसने अपने बेटे और बेटी होने का अधिकार खो दिया
यह सब बातें मैंने bible से सीखी जिसको परमेश्वर ने लिखवाई हैं अपनी आत्मा के द्वारा क्योंकि परमेश्वर आत्मा हैं और हमें परमेश्वर के पास जाने के लिए आत्मिक बनाना पड़ेगा इसमे परमेश्वर का पवित्र आत्मा हर एक मनुष्य की सहायता करता हैं।
क्या परमेश्वर ने बस लिखा हैं क्या ये बात यही खत्म हो जाती हैं परमेश्वर परमेश्वर इस लिए हैं क्योंकि वो जीवित हैं और आज उसके नाम पर विश्वास करने वालो के बीच में परमेश्वर ऐसे ऐसे काम करते हैं जो मनुष्यों के लिए असंभव हैं।
नीचे कुछ वचनो को Bible में से देखते हैं:
क्या हम ये विश्वास करते हैं की जो हम देखते हैं उसका कोई न कोई रचयता हैं?
आपका जवाब या तो हाँ हो सकता हैं, या ना हो सकता हैं।
पहले मैं हाँ वाले के लिए लिखता हूँ, मैं अपने विचार को पूरी इमानदारी से आपके बीच मे रखूँगा।
देखें कोई हैं जिसने सब कुछ बनाया हैं... उसने मनुष्य को भी बनाया हैं यानी आप और मैं। यदि आप इसको पढ़ पा रहे हैं तो जान लीजिए की आपको सब सृष्टि से अलग और अनोखा बनाया गया हैं।
"उसने हमें अपनी प्रतिमा में बनाया, अपनी समानता में।"
उत्पत्ति 1:27
हम जीवन के अनुभवों से गुजरते हैं — जन्म, मृत्यु, भावनाएं जैसे प्रेम, दया, माफ़ी, क्रोध, दुख आदि — ये सब हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या ये सब किसी एक रचयता द्वारा निर्मित हैं?
"परमेश्वर आत्मा है; और ज़रूरी है कि उसकी उपासना आत्मा और सच्चाई से की जाए।"
यूहन्ना 4:24
जब हम अपने रचयता को पुकारते हैं, वह हमें सुनता है।
"तू मुझ से पुकार और मैं तुझे उत्तर दूंगा, और मैं तुझे बड़ी और अद्भुत बातें बताऊंगा जिन्हें तू नहीं जानता।"
यिर्मयाह 33:3
जब मैंने Bible को पढ़ा, तब मेरे जीवन के सारे सवालों के जवाब मिलने लगे।
मनुष्य परमेश्वर की समानता में बनाया गया है। उसने हमें अधिकार और स्वतंत्रता दी है।
"क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो परन्तु अनन्त जीवन पाए।"
यूहन्ना 3:16
परमेश्वर चाहते हैं कि हम उसके वचनों को माने, उसकी संगति में रहें। लेकिन शैतान ने हमें परमेश्वर से दूर करने की कोशिश की।
मनुष्य ने उसकी आज्ञा तोड़ी, और मृत्यु उसके जीवन में आ गई।
परंतु परमेश्वर का प्रेम अब भी जीवित है। वह आत्मा है और हमें अपने आत्मा के द्वारा चलाता है।
"और जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सारे सत्य की ओर ले चलेगा।"
यूहन्ना 16:13
क्या परमेश्वर ने बस लिखा है? नहीं। वह जीवित है और आज भी विश्वासियों के बीच में कार्य करता है।
क्या आप उसे जानना चाहते हैं? उसका वचन आपके लिए है।
क्या हम ये विश्वास करते हैं की जो हम देखते हैं उसका कोई न कोई रचयता हैं?
आपका जवाब या तो हाँ हो सकता हैं, या ना हो सकता हैं।
पहले मैं हाँ वाले के लिए लिखता हूँ, मैं अपने विचार को पूरी इमानदारी से आपके बीच मे रखूँगा।
देखें कोई हैं जिसने सब कुछ बनाया हैं, उसने मनुष्य को भी बनाया हैं यानी आप और मैं। यदि आप इसको पढ़ पा रहे हैं तो जान लीजिए कि आपको सब सृष्टि से अलग और अनोखा बनाया गया हैं।
मनुष्य अपने जीवन को कुछ ऐसे बिताते हैं जैसे वो सबसे अलग हैं।...
हम सबके जीवन में वो क्षण आते हैं जब हम किसी नवजात जीवन के आने से खुश होते हैं और किसी प्रियजन के जाने से दुखी होते हैं।...
जब मैंने Bible को पढ़ा, तब मेरे सारे सवालों के जवाब मिलने लगे।...
परमेश्वर चाहता हैं कि हम उससे संबंध बनाएं। उसने हमें स्वतंत्रता दी है, लेकिन हम शैतान के झांसे में आ गए और उससे दूर हो गए।
परंतु आज भी परमेश्वर जीवित है और जो उस पर विश्वास करते हैं, उनके जीवनों में वह चमत्कार करता हैं।
क्या आप अपने रचयिता को जानना चाहेंगे?
क्या इस सृष्टि का कोई रचयिता है?
क्या हम ये विश्वास करते हैं की जो हम देखते हैं उसका कोई न कोई रचयता हैं? आपका जवाब या तो हाँ हो सकता हैं, या ना हो सकता हैं।
पहले मैं हाँ वाले के लिए लिखता हूँ, मैं अपने विचार को पूरी इमानदारी से आपके बीच मे रखूँगा।
देखें कोई हैं जिसने सब कुछ बनाया हैं उसने मनुष्य को भी बनाया हैं यानी आप और मैं। और यदि आप इसको पढ़ पा रहे हैं तो जान लीजिए की आपको सब सृष्टि से अलग और अनोखा बनाया गया है।
"परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में उत्पन्न किया।"
— उत्पत्ति 1:27
मनुष्य अपने जीवन को कुछ ऐसे बिताते हैं जैसे वह सबसे अलग हो। बहुत सारे जीव, पशु, पक्षी लुप्त हो गए हैं, लेकिन मनुष्य अपनी बुद्धि और समझ के कारण आगे बढ़ता जा रहा है।
हम सब जीवन में जन्म और मृत्यु दोनों को देखते हैं, इससे हमारे मन में यह विचार आता है कि क्या जीवन की शुरुआत और अंत के बीच का कोई उद्देश्य है?
"सब कुछ का एक अवसर और हर काम का एक समय है। जन्म का समय और मृत्यु का समय।"
— सभोपदेशक 3:1-2
हम अपने जीवन में भावनाओं का अनुभव करते हैं — प्रेम, दया, क्रोध, दुख आदि — जो हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि इन भावनाओं का स्रोत क्या है?
इन सब अनुभवों से हम पाते हैं कि हममें आत्मा है, जो परमेश्वर द्वारा दी गई है।
"यहोवा परमेश्वर ने मिट्टी से मनुष्य को रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंका, और वह जीवित प्राणी बन गया।"
— उत्पत्ति 2:7
हर वस्तु एक उद्देश्य के साथ बनाई गई है और परमेश्वर की रचना अत्यंत सुंदर है।
जब हम परमेश्वर को पुकारते हैं तो वह सुनता है, क्योंकि वह चाहता है कि हम उसके साथ संगति करें।
"तू मुझे पुकारेगा, और मैं तुझे उत्तर दूँगा।"
— यिर्मयाह 33:3
जब मैंने बाइबल को पढ़ा, तो मेरे सारे सवालों के जवाब मिलने लगे। मुझे समझ आया कि परमेश्वर ने हमें बेटा और बेटी कहकर अपनाया है।
"मैं तुम्हारा पिता बनूँगा, और तुम मेरे पुत्र और पुत्रियाँ कहलाओगे।"
— 2 कुरिन्थियों 6:18
शैतान ने मनुष्य को परमेश्वर से दूर किया और उसे आज्ञा उल्लंघन के लिए उकसाया।
लेकिन परमेश्वर ने हमें फिर से जीवन देने के लिए यीशु मसीह को भेजा।
"क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो परन्तु अनन्त जीवन पाए।"
— यूहन्ना 3:16
परमेश्वर जीवित है और आज भी विश्वास करने वालों के बीच काम करता है।
"यीशु मसीह कल, आज और सदा एक सा है।"
— इब्रानियों 13:8
यदि आप जानना चाहते हैं कि आपको किसने बनाया, और आप किस उद्देश्य से इस धरती पर आए हैं, तो परमेश्वर के वचन को पढ़िए।


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